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2026-05-17लेखक Satva Organics

शिमला के सेब किसान ने सत्वा वर्मीकंपोस्ट से बगान कैसे संभाला

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शिमला के सेब किसान ने सत्वा वर्मीकंपोस्ट से बगान कैसे संभाला

2019 में शिमला के पास राजिंदर सिंह के दो एकड़ रॉयल डिलीशियस ब्लॉक थके दिखते थे—छोटे फल, फीका रंग, और डीएपी पर भी न सुधरने वाली मिट्टी। 2025 तक वही बगान पंचायत में चर्चा का विषय बन गया। मुख्य बदलाव: धैर्य और सही समय पर सत्वा ऑर्गेनिक्स प्रीमियम वर्मीकंपोस्ट।

हिमाचल में सेब की चुनौती

सेब राज्य की पहचान है, फिर भी कई उत्पादक छोटे फल, कम फूल और मंडी में कम ग्रेड देखते हैं। यूरिया–डीएपी से त्वरित हरियाली मिली, पर लाभकारी कवक–बैक्टीरिया खत्म हो गए। मिट्टी में फॉस्फोरस बंधा रहा—जड़ें नहीं ले पाईं।

वर्मीकंपोस्ट सेब के लिए क्यों काम करता है

  • मिट्टी संरचना: कार्बनिक पदार्थ ढलान पर कण बांधता है।
  • नमी: बारिश के बीच तनाव कम।
  • पोषक: सूक्ष्मजीव बंधे पोषक खोलते हैं।

सत्वा में नीम–सरसों अर्क और ट्राइकोडर्मा भी हैं—बायोएक्टिव खाद पर और पढ़ें।

राजिंदर की योजना

  1. वसंत (अप्रैल–मई): परिपक्व पेड़ पर 5–8 किग्रा ड्रिप लाइन के नीचे; 24 घंटे में सिंचाई।
  2. फल सेट से पहले: कमजोर ब्लॉक पर हल्का टॉप-ड्रेस।
  3. मानसून तैयारी: मानसून हैक्स देखें।
"दादा जी गाय की खाद से खेती करते थे। सत्वा वर्मीकंपोस्ट ने वही जीवित मिट्टी लौटाई—हर साल दोहराने योग्य," राजिंदर कहते हैं।

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